मजबूरी शायरी, Majboori Shayari

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gam chupa kar

मेहफिल मैं कुछ तो सुनाना पडता है
ग़म छुपाकर मुस्कुराना पडता है
कभी उनके हम भी थे दोस्त
आज कल उन्हे याद दिलाना पडता है

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labour-day-essay-in-hindi

labour day essay in hindi

मेहनत उसकी लाठी है मज़बूत उसकी काठी है
हर बाधा को कर देता है दूर दुनिया उसे कहती है मजदूर
लेबर दे शायरी

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meri-majboori-shayari

meri majboori shayari

मुस्कुरा देता हूँ अक्सर देखकर पुराने खत तेरे
तू झूठ भी कितनी सच्चाई से लिखती थी

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meri-majburi-shayari

meri majburi shayari

माना के मर जाने पर भुला दिए जाते है लोग जमाने में
पर मै तो अभी जिन्दा हूँ फिर कैसे उसने मुझे भुला दिया
मजबूरी शायरी

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uski mazboori shayari

वो रोए बहुत पर मुह मोड़ के रोए
कोई तो मजबूरी होगी दिल तोड़ कर रोए
मेरे सामने कर दिए मेरे तस्वीर के टुकड़े
पता चला पीछे वो उन्हें जोड़ के रोए
मजबूरी शायरी

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