mohabbt ka gwah

izhaar-shayari-mri-mohabbat

वो मुझ तक आने की राह चाहता है
लेकिन मेरी मोहब्बत का गवाह चाहता है
खुद आते जाते मौसमो की तरहा है
और मेरे इश्क़ की इंतेहः चाहता है

Izhaar Shayari - इजहार शायरी