nawab ke jaisa

बैठ कर टॉयलेट में नबाब की जैसे,
ठंडी के मौसम में सोचता हूँ ऐसे,
कि बेटा, कर तो ली हैं तूने,
अब ठंडे पानी से धोएगा कैसे.

from Thandi Shayari