talabgaar hai jannat ka

talabgaar hai jannat ka

बाह रही अजीब हैं नादान-ए-दिल की खवाइश
या रब अमल कुछ नहीं और दिल तलबगार हैं जन्नत का!
जुम्मा मुबारक

from Jumma Mubarak Shayari